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Proverbs 1 - 2

The proverbs of Solomon the son of David, king of Israel; To know wisdom and instruction; to perceive the words of understanding; To receive the instruction of wisdom, justice, and judgment, anequity; To give subtilty to the simple, to the young man knowledge and discretion.

Proverbs 1

1 The proverbs of Solomon the son of David, king of Israel;
2 To know wisdom and instruction; to perceive the words of understanding;
3 To receive the instruction of wisdom, justice, and judgment, and equity;
4 To give subtilty to the simple, to the young man knowledge and discretion.
5 A wise man will hear, and will increase learning; and a man of understanding shall attain unto wise counsels:
6 To understand a proverb, and the interpretation; the words of the wise, and their dark sayings.
7 The fear of the Lord is the beginning of knowledge: but fools despise wisdom and instruction.
8 My son, hear the instruction of thy father, and forsake not the law of thy mother:
9 For they shall be an ornament of grace unto thy head, and chains about thy neck.
10 My son, if sinners entice thee, consent thou not.
11 If they say, Come with us, let us lay wait for blood, let us lurk privily for the innocent without cause:
12 Let us swallow them up alive as the grave; and whole, as those that go down into the pit:
13 We shall find all precious substance, we shall fill our houses with spoil:
14 Cast in thy lot among us; let us all have one purse:
15 My son, walk not thou in the way with them; refrain thy foot from their path:
16 For their feet run to evil, and make haste to shed blood.
17 Surely in vain the net is spread in the sight of any bird.
18 And they lay wait for their own blood; they lurk privily for their own lives.
19 So are the ways of every one that is greedy of gain; which taketh away the life of the owners thereof.
20 Wisdom crieth without; she uttereth her voice in the streets:
21 She crieth in the chief place of concourse, in the openings of the gates: in the city she uttereth her words, saying,
22 How long, ye simple ones, will ye love simplicity? and the scorners delight in their scorning, and fools hate knowledge?
23 Turn you at my reproof: behold, I will pour out my spirit unto you, I will make known my words unto you.
24 Because I have called, and ye refused; I have stretched out my hand, and no man regarded;
25 But ye have set at nought all my counsel, and would none of my reproof:
26 I also will laugh at your calamity; I will mock when your fear cometh;
27 When your fear cometh as desolation, and your destruction cometh as a whirlwind; when distress and anguish cometh upon you.
28 Then shall they call upon me, but I will not answer; they shall seek me early, but they shall not find me:
29 For that they hated knowledge, and did not choose the fear of the Lord:
30 They would none of my counsel: they despised all my reproof.
31 Therefore shall they eat of the fruit of their own way, and be filled with their own devices.
32 For the turning away of the simple shall slay them, and the prosperity of fools shall destroy them.
33 But whoso hearkeneth unto me shall dwell safely, and shall be quiet from fear of evil.

Proverbs 2

2 My son, if thou wilt receive my words, and hide my commandments with thee;
2 So that thou incline thine ear unto wisdom, and apply thine heart to understanding;
3 Yea, if thou criest after knowledge, and liftest up thy voice for understanding;
4 If thou seekest her as silver, and searchest for her as for hid treasures;
5 Then shalt thou understand the fear of the Lord, and find the knowledge of God.
6 For the Lord giveth wisdom: out of his mouth cometh knowledge and understanding.
7 He layeth up sound wisdom for the righteous: he is a buckler to them that walk uprightly.
8 He keepeth the paths of judgment, and preserveth the way of his saints.
9 Then shalt thou understand righteousness, and judgment, and equity; yea, every good path.
10 When wisdom entereth into thine heart, and knowledge is pleasant unto thy soul;
11 Discretion shall preserve thee, understanding shall keep thee:
12 To deliver thee from the way of the evil man, from the man that speaketh froward things;
13 Who leave the paths of uprightness, to walk in the ways of darkness;
14 Who rejoice to do evil, and delight in the frowardness of the wicked;
15 Whose ways are crooked, and they froward in their paths:
16 To deliver thee from the strange woman, even from the stranger which flattereth with her words;
17 Which forsaketh the guide of her youth, and forgetteth the covenant of her God.
18 For her house inclineth unto death, and her paths unto the dead.
19 None that go unto her return again, neither take they hold of the paths of life.
20 That thou mayest walk in the way of good men, and keep the paths of the righteous.
21 For the upright shall dwell in the land, and the perfect shall remain in it.
22 But the wicked shall be cut off from the earth, and the transgressors shall be rooted out of it.

India hindi

कहावत का खेल 1 - 2

1 इस्राएल के राजा दाऊद के पुत्र सुलैमान के नीतिवचन;

2 बुद्धि और शिक्षा को जानना; समझ की बातें समझना;

3 बुद्धि, न्याय, निर्णय और निष्पक्षता की शिक्षा प्राप्त करना;

4 भोले लोगों को चतुराई सिखाना, और जवान को ज्ञान और विवेक देना।

5 बुद्धिमान सुनकर अपनी विद्या बढ़ाएगा; और समझदार मनुष्य बुद्धिमानी की सलाह पाएगा:

6 कहावत और उसका अर्थ समझना; बुद्धिमानों के वचन और उनकी गुप्त बातें समझना।

7 यहोवा का भय मानना ​​ज्ञान का मूल है, परन्तु मूर्ख लोग बुद्धि और शिक्षा को तुच्छ जानते हैं।

8 हे मेरे पुत्र, अपने पिता की शिक्षा सुन, और अपनी माता की शिक्षा को न त्याग।

9 क्योंकि वे तेरे सिर के लिये शोभायमान मुकुट और तेरे गले के लिये कन्ठमाला ठहरेंगे।

10 हे मेरे पुत्र, यदि पापी तुझे फुसलाएं, तो उनकी बात न मानना।

11 यदि वे कहें, हमारे संग चलो, हम हत्या करने की घात लगाएं, हम निर्दोषों की घात में अकारण घात लगाएं:

12 हम उन्हें कब्र के समान जीवित ही निगल जाएं; और गड़हे में पड़े हुओं के समान पूरा का पूरा निगल जाएं:

13 हम सब प्रकार की बहुमूल्य वस्तुएं पाएंगे, हम अपने घरों को लूट से भर लेंगे: 14 हमारे बीच अपना भाग बाँट ले; हम सब का एक ही बटुआ हो:

15 हे मेरे पुत्र, तू उनके संग मार्ग में न चलना; उनके मार्ग से अपने पांव को रोक रखना:

16 क्योंकि उनके पांव बुराई की ओर दौड़ते हैं, और हत्या करने को फुर्ती करते हैं।

17 निश्चय ही किसी पक्षी के देखते हुए जाल फैलाना व्यर्थ है।

18 और वे अपने ही खून की घात में घात लगाते हैं; वे अपने ही प्राणों की घात में घात लगाते हैं।

 19 सब लोभी मनुष्यों की चाल ऐसी ही होती है; जो अपने स्वामी का प्राण हर लेती है।

20 बुद्धि बाहर चिल्लाती है; वह सड़कों में अपनी वाणी सुनाती है:
21 वह सभा के मुख्य स्थान में, फाटकों के द्वारों पर पुकारती है; वह नगर में अपने वचन सुनाती है,
22 हे भोले लोगों, तुम कब तक सरलता से प्रीति रखोगे? और ठट्ठा करनेवाले ठट्ठा करने से प्रसन्न होते हैं, और मूर्ख ज्ञान से घृणा करते हैं?
23 मेरी डांट सुनकर तुम फिरो; देखो, मैं अपनी आत्मा तुम पर उंडेलूंगा, मैं अपने वचन तुम पर प्रगट करूंगा।
24 क्योंकि मैं ने बुलाया, और तुम ने इन्कार किया; मैं ने अपना हाथ बढ़ाया, और किसी ने ध्यान नहीं दिया;
25 परन्तु तुम ने मेरी सारी सम्मति को तुच्छ जाना, और मेरी डांट को भी न माना।
26 मैं भी तुम्हारी विपत्ति पर हंसूंगा; जब तुम्हारा भय आएगा, तब मैं ठट्ठा करूंगा;
27 जब तुम्हारा भय उजाड़ के समान आएगा, और तुम्हारा विनाश बवंडर के समान आएगा; जब संकट और पीड़ा तुम पर आएगी।
28 तब वे मुझे पुकारेंगे, परन्तु मैं उत्तर न दूंगा; वे मुझे यत्न से ढूंढ़ेंगे, परन्तु मुझे न पाएंगे।
29 क्योंकि उन्होंने ज्ञान से घृणा की, और यहोवा का भय मानना ​​न चाहा।
30 उन्होंने मेरी सम्मति पर ध्यान न दिया; उन्होंने मेरी सब डांट को तुच्छ जाना।
31 इस कारण वे अपने ही चालचलन का फल खाएंगे, और अपनी ही युक्तियों से भर जाएंगे।
32 क्योंकि भोले लोगों का भटक जाना उन्हें मार डालेगा, और मूर्खों का सुख उन्हें नाश करेगा।
33 परन्तु जो मेरी सुनेगा, वह निडर रहेगा, और विपत्ति के भय से चैन से रहेगा।

2 हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने मन में छिपा रखे;

2 और बुद्धि की ओर कान लगाए, और समझ की ओर मन लगाए;

3 हां, यदि तू ज्ञान के पीछे चिल्लाए, और समझ के लिये ऊंचे शब्द से बोले;

4 यदि तू उसको चान्दी के समान ढूंढ़े, और गुप्त धन के समान उसकी खोज करे;

5 तब तू यहोवा का भय समझेगा, और परमेश्वर का ज्ञान पाएगा।

6 क्योंकि यहोवा बुद्धि देता है, ज्ञान और समझ उसके मुंह से निकलती है।

7 वह धर्मियों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; वह उन लोगों के लिये ढाल है जो धर्म से चलते हैं।

8 वह न्याय के मार्गों की रक्षा करता है, और अपने पवित्र लोगों के मार्ग की रक्षा करता है।

9 तब तू धर्म, न्याय, और न्याय को समझेगा, हां, हर एक अच्छा मार्ग।

10 बुद्धि तेरे हृदय में प्रवेश करेगी, और ज्ञान तेरे मन को प्रिय लगेगा;

11 विवेक तेरी रक्षा करेगा, समझ तेरी रक्षा करेगी।

12 तुझे बुरे मनुष्य के मार्ग से बचाए, उस मनुष्य से जो उलटी बातें बोलता है।

13 जो सीधाई के मार्ग को छोड़कर अन्धकार के मार्गों पर चलते हैं।

14 जो बुराई करने से आनन्दित होते हैं, और दुष्टों की उलटी चाल से प्रसन्न होते हैं।

15 जिनके मार्ग टेढ़े हैं, और जो अपने मार्ग में टेढ़े हैं।

16 तुझे पराई स्त्री से बचाए, अर्थात् उस अजनबी से जो अपनी बातों से चापलूसी करती है।

17 जो अपनी जवानी के मार्गदर्शक को छोड़ देती है, और अपने परमेश्वर की वाचा को भूल जाती है।

18 क्योंकि उसका घर मृत्यु की ओर झुका है, और उसके मार्ग मरे हुओं की ओर।

19 जो उसके पास जाते हैं, वे फिर नहीं लौटते, और न जीवन के मार्ग को पकड़ते हैं। 20 ताकि तू भले लोगों के मार्ग पर चले, और धर्मियों के मार्गों पर बना रहे।
21 क्योंकि धर्मी लोग देश में बसे रहेंगे, और सिद्ध लोग उस में बने रहेंगे।
22 परन्तु दुष्ट लोग पृथ्वी पर से नाश किए जाएँगे, और अपराधी उस में से उखाड़े जाएँगे।

    "AF":  "Afghanistan",
    "AX":  "Aland Islands",
    "AL":   "Albania",
    "DZ":  "Algeria",
     AS":  "American                             Samoa", 
    "AD": "Andorra",
    "AO": "Angola",
    "AI":   "Anguilla",
    "AQ": "Antarctica",
    "AG": "Antigua and                         Barbuda",
    "AR": "Argentina", 
    "AM": "Armenia",   
    "AW": "Aruba",
    "AU": "Australia",
    "AT": "Austria", 
    "AZ": "Azerbaijan",
    "BS": "Bahamas",
    "BH": "Bahrain",
    "BD": "Bangladesh",
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    "BJ":  "Benin",
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    "BQ": "Bonaire, Sint                Eustatius and Saba",
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    "BR":  "Brazil",
    "IO":  "British Indian                         Ocean 
    "BN": "Brunei                                   Darussalam",     

    "BG":  "Bulgaria",
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    "CY" "Cyprus" T
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    "MD": "Moldova, ",
    "MC": "Monaco",
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    "NL": "Netherlands",
    "AN": "Netherlands                         Antilles",
    "NC": "New Caledonia",
    "NZ": "New Zealand",
    "NI":  "Nicaragua",
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    "NU": "Niue",
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    "MP": "Northern Mariana                 Islands",
    "NO": "Norway",
    "OM": "Oman",
    "PK":   "Pakistan",
    "PW":  "Palau",
    "PS":   "Palestinian                           Territory, 
    "PA":   "Panama",
    "PG": "Papua New                          Guinea",
    "PY": "Paraguay",
    "PE": "Peru",
    "PH": "Philippines",
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    "PL":   "Poland",
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    "QA":  "Qatar",
    "RE":   "Reunion",
    "RO":  "Romania",
    "RU":   "Russian                                Federation",
    "RW":  "Rwanda",
    "BL":    "Saint Barthelemy",
    "SH":   "Saint Helena",
    "KN":   "Saint Kitts and                       Nevis",
    "LC":   "Saint Lucia",
    "MF":  "Saint Martin"
    "VC": "St Vincent and the                 Grenadines",
    "WS": "Samoa",
    "SM":  "San Marino",
    "ST":   "Sao Tome and                       Principe",
    "SA":  "Saudi Arabia",
    "SN": "Senegal",
    "RS":  "Serbia",
    "CS": "Serbia and                          Montenegro",
    "SC": "Seychelles",
    "SL":  "Sierra Leone",
    "SG": "Singapore",
    "SX":  "Sint Maarten",
    "SK":  "Slovakia",
    "SI":   "Slovenia",
    "SB":  "Solomon Islands",
    "SO": "Somalia",
    "ZA": "South Africa",
    "GS": "South Georgia                      South Sandwich                    Islands",
    "SS": "South Sudan",
    "ES": "Spain", 
    "LK": "Sri Lanka",
    "SD": "Sudan",
    "SR": "Suriname",
    "SJ": "Svalbard and Jan                   Mayen",
    "SZ": "Swaziland",
    "SE": "Sweden",
    "CH": "Switzerland",
    "SY": "Syrian Arab                          Republic",
    "TW": "Taiwan, 
    "TJ":   "Tajikistan",
    "TZ":  "Tanzania
    "TH":  "Thailand",
    "TL":   "Timor-Leste",
    "TG":  "Togo",
    "TK":   "Tokelau",
    "TO":  "Tsonga",
    "TT":   "Trinidad and                         Tobago",
    "TN":  "Tunisia",
    "TR":   "Turkey",
    "TM": "Turkmenistan",
    "TC": "Turks and Caicos 
    "TV": "Tuvalu",
    "UG": "Uganda",
    "UA": "Ukraine",
    "AE": "United Arab                          Emirates",
    "GB": "Great Britain",
    "US": "United States",
    "UM": "United States              Minor Outlying Islands",
    "UY": "Uruguay",
    "UZ": "Uzbekistan",
    "VU": "Vanuatu",
    "VE": "Venezuela",
    "VN": "Viet Nam",
    "VG": "Virgin Islands,                       British",
    "VI":   "Virgin Islands,                       U.S.",
    "WF":  "Wallis and                            Futuna",
    "EH":   "Western Sahara",
    "YE":    "Yemen",
    "ZM":  "Zambia",
    "ZW": "Zimbabwe"

PSALM 117
O praise the Lord, all ye nations:praise him, all ye people. For his merciful kindness is great toward us:and the truth of the Lord endureth for ever.
Praise ye the Lord.

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MISSION STATEMENT

 

Officially chosen and authorized by Jesus himself. I Stephen Hodgkiss am humbly chosen, clothed in salvation, trustworthy, devoted, committed, and set apart for God's good works and his glory In all robes of righteousness, truthfulness, grace and households of God's good faith. For we are his workmanship, created in Christ Jesus unto good works, which God hath before ordained that we should walk in them.  Ephesians 2: 10 I am the founder and managing director of an international company called Church of England Limited. I pray, finance, walk, work, help, build, teach, train, promote, and contract with like-minded others of all countries worldwide exclusively in Jesus' forthcoming loving purpose to fulfil my Abrahamic covenant assignment/calling he has personally placed on and over my life, I plead the blood of Jesus over all the enemies of the Universal Creator of Heaven and earth,  in God's good faith and according to the almighty father God's newly published online "WORD OF GOD". The Church of England Limited and its staff is against all forms of idolatry and rebuke it all back to the pits of hell. Church of England Limited is independent of any third-party mainstream paganistic religion, its government, and Sunday church parish services in all its known forms by the blood of Christ. Our divine platform is open to all inquiries. We have now been set apart for the exclusive official leadership of the KING of kings and LORD of lord's words or instruction upon his soon-to-come return to earth. In the mighty name of Jesus Amen

 

 

 

 

 

 

 

 

And we know that all things work together for good to them that love God,

to them who are the called according to his purpose. Romans 8: 28 

If God is for us who can go against us  Romans 8: 31 

For I testify unto every man that heareth the words of the prophecy of this book, If any man shall add unto these things, God shall add unto him the plagues that are written in this book: And if any man shall take away from the words of the book of this prophecy, God shall take away his part out of the book of life, and out of the holy city, and from the things which are written in this book. Revelations 22: 18 - 19

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